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संस्कृत व्याकरण धातु रूप 17 अक्टूबर 2026

धातु रूप (पठ्, गम्, भू, अस्)

लेखक: ज्ञान आर्काइव

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इस लेख में

1. 1. आधारभूत संकल्पनाएँ: पद, गण, पुरुष एवं वचन 2. 2. पाँचों लकारों का परिचय एवं स्मरण-सूत्र (संक्षिप्त प्रत्यय) 3. 3. परिवर्तनीय एवं विशेष धातुओं की मास्टर सारणी (लट् बनाम लृट् लकार) 4. 4. परस्मैपदी धातुओं के विस्तृत रूप (पाँचों लकारों में सम्पूर्ण तालिकाएँ) 5. 5. आत्मनेपदी धातुओं के विस्तृत रूप (पाँचों लकारों में सम्पूर्ण तालिकाएँ) 6. 6. सीबीएसई (एनसीईआरटी) परीक्षा हेतु वाक्य-प्रयोग के अचूक नियम 7. 7. विस्तृत अभ्यास के प्रश्न (वर्णनात्मक अभ्यास - उत्तर सहित) 8. बहुविकल्पीय प्रश्न — स्तर 1: आसान (कक्षा 6–8) 9. बहुविकल्पीय प्रश्न — स्तर 2: मध्यम (कक्षा 9–10, बोर्ड परीक्षा) 10. बहुविकल्पीय प्रश्न — स्तर 3: कठिन (कक्षा 11–12, प्रतियोगी परीक्षाएँ) 11. उत्तर कुंजी (उत्तर और कारण) परीक्षा दें (टेस्ट दें)

धातु रूप

संस्कृत व्याकरण में क्रिया के मूल रूप को 'धातु' कहते हैं (जैसे— पठ्, गम्, भू, अस्, कृ, सेव् आदि)। जिस प्रकार मूल संज्ञा शब्दों (प्रातिपदिक) में 'सुप्' प्रत्यय जोड़कर शब्द रूप बनाए जाते हैं, उसी प्रकार मूल धातुओं में तीन पुरुषों और तीन वचनों के अनुसार 18 'तिङ्' प्रत्यय जोड़े जाते हैं। तिङ् प्रत्यय जुड़ने के बाद बने क्रियापदों को 'तिङन्त पद' या 'धातु रूप' कहा जाता है। परीक्षा दें (टेस्ट दें)

1. आधारभूत संकल्पनाएँ: पद, गण, पुरुष एवं वचन

(क) धातुओं के तीन भेद (पद-विभाग)

संस्कृत में तिङ् प्रत्ययों के आधार पर धातुएँ तीन प्रकार की होती हैं:

1. परस्मैपदी धातुएँ: जिन धातुओं में परस्मैपद के 9 प्रत्यय (ति, तः, अन्ति, सि, थः, थ, मि, वः, मः) लगते हैं। (जैसे— पठ्, गम्, लिख्, हस्, पा, स्था, दृश्, अस्, नम्, शक्, आप् आदि)।

2. आत्मनेपदी धातुएँ: जिन धातुओं में आत्मनेपद के 9 प्रत्यय (ते, इते, अन्ते, से, इथे, ध्वे, ए, वहे, महे) लगते हैं। (जैसे— सेव्, लभ्, रुच्, मुद्, वृध्, सह्, याच्, भाष्, वन्द् आदि)।

3. उभयपदी धातुएँ: जिन धातुओं के रूप परस्मैपद और आत्मनेपद दोनों में चलते हैं। (जैसे— कृ, दा, नी, पच्, भज्, ब्रू, कथ्, चिन्त्, भक्ष् आदि)।

(ख) संस्कृत में दस गण (दशगणी)

धातु और प्रत्यय के बीच जुड़ने वाले विकरण चिह्न (जैसे— अ, श्न, नु, ना, अय आदि) के आधार पर समस्त धातुओं को 10 गणों में बाँटा गया है:

1. भ्वादिगण (प्रथम गण - बीच में 'अ' जुड़ता है)

जैसे: भू ----- भवति

पठ् ----- पठति

2. अदादिगण (द्वितीय गण - कोई विकरण नहीं जुड़ता)

जैसे: अस् ----- अस्ति

हन् ----- हन्ति

3. जुहोत्यादिगण (तृतीय गण - धातु का द्वित्व होता है)

जैसे: दा ----- ददाति

हु ----- जुहोति

4. दिवादिगण (चतुर्थ गण - बीच में 'य' जुड़ता है)

जैसे: नश् ----- नश्यति

नृत् ----- नृत्यति

5. स्वादिगण (पञ्चम गण - बीच में 'नु/नो' जुड़ता है)

जैसे: शक् ----- शक्नोति

आप् ----- आप्नोति

श्रु ----- शृणोति

6. तुदादिगण (षष्ठ गण - बीच में 'अ' जुड़ता है)

जैसे: तुद् ----- तुदति

प्रच्छ् ----- पृच्छति

इष् ----- इच्छति

7. रुधादिगण (सप्तम गण - बीच में 'न/न्' जुड़ता है)

जैसे: रुध् ----- रुणद्धि

भुज् ----- भुनक्ति

8. तनादिगण (अष्टम गण - बीच में 'उ/ओ' जुड़ता है)

जैसे: तन् ----- तनोति

कृ ----- करोति

9. क्र्यादिगण (नवम गण - बीच में 'ना/नी' जुड़ता है)

जैसे: क्री ----- क्रीणाति

ज्ञा ----- जानाति

ग्रह् ----- गृह्णाति

10. चुरादिगण (दशम गण - बीच में 'अय' जुड़ता है)

जैसे: चुर् ----- चोरयति

कथ् ----- कथयति

चिन्त् ----- चिन्तयति

(ग) पुरुष एवं कर्ता-क्रिया समन्वय की मुख्य तालिका

संस्कृत में क्रिया का पुरुष और वचन सदैव कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार होता है (कर्तृवाच्य में क्रिया पर कर्ता के लिङ्ग का कोई प्रभाव नहीं पड़ता— जैसे 'बालकः पठति' और 'बालिका पठति'):

पुरुषःएकवचनम् (कर्ता → क्रिया)द्विवचनम् (कर्ता → क्रिया)बहुवचनम् (कर्ता → क्रिया)
प्रथम पुरुषः
(अन्य सभी संज्ञा/सर्वनाम एवं 'भवत्')
सः / सा / भवान् / बालकः
पठति
तौ / ते / भवन्तौ / बालकौ
पठतः
ते / ताः / भवन्तः / बालकाः
पठन्ति
मध्यम पुरुषः
(केवल 'युष्मद्' शब्द के कर्ता)
त्वम् पठसि
(तुम पढ़ते हो)
युवाम् पठथः
(तुम दोनों पढ़ते हो)
यूयम् पठथ
(तुम सब पढ़ते हो)
उत्तम पुरुषः
(केवल 'अस्मद्' शब्द के कर्ता)
अहम् पठामि
(मैं पढ़ता हूँ)
आवाम् पठावः
(हम दोनों पढ़ते हैं)
वयम् पठामः
(हम सब पढ़ते हैं)

2. पाँचों लकारों का परिचय एवं स्मरण-सूत्र (संक्षिप्त प्रत्यय)

संस्कृत व्याकरण में कुल 10 लकार होते हैं, जिनमें से कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में 5 मुख्य लकार निर्धारित हैं। नीचे प्रत्येक लकार का परिचय और अंत में जुड़ने वाले संक्षिप्त स्मरण-सूत्र दिए गए हैं:

(1) लट् लकार (वर्तमान काल - कार्य अभी हो रहा है)

  • पहचान: हिन्दी वाक्यों के अंत में 'ता है, ती है, ते हैं, रहा है, रही है' आता है।
पुरुषःपरस्मैपद स्मरण-सूत्र
(एक / द्वि / बहु)
आत्मनेपद स्मरण-सूत्र
(एक / द्वि / बहु)
प्रथम पुरुषः-अति / -अतः / -अन्ति
(पठति, पठतः, पठन्ति)
-अते / -एते / -अन्ते
(सेवते, सेवेते, सेवन्ते)
मध्यम पुरुषः-असि / -अथः / -अथ
(पठसि, पठथः, पठथ)
-असे / -एथे / -अध्वे
(सेवसे, सेवेथे, सेवध्वे)
उत्तम पुरुषः-आमि / -आवः / -आमः
(पठामि, पठावः, पठामः)
-ए / -आवहे / -आमहे
(सेवे, सेवावहे, सेवामहे)

(2) लृट् लकार (सामान्य भविष्यत् काल - कार्य आने वाले समय में होगा)

  • पहचान: हिन्दी वाक्यों के अंत में 'गा, गी, गे' (पढ़ेगा, जाएगा) आता है।
  • स्मरण-सूत्र: लट् लकार के प्रत्ययों के ठीक पहले '-इष्य', '-ष्य' या '-स्य' जोड़ देने से लृट् लकार के रूप बन जाते हैं!
    • परस्मैपद: -इष्यति / -इष्यतः / -इष्यन्ति।

-इष्यसि / -इष्यथः / -इष्यथ।

-इष्यामि / -इष्यावः / -इष्यामः।

    • आत्मनेपद: -इष्यते / -इष्येते / -इष्यन्ते।

-इष्यसे / -इष्येथे / -इष्यध्वे।

-इष्ये / -इष्यावहे / -इष्यामहे।

लृट् लकार का अति महत्त्वपूर्ण नियम (मूल धातु की वापसी):

जो धातुएँ लट्, लङ्, लोट् और विधिलिङ् लकार में अपना रूप बदल लेती हैं।

जैसे— गम् ----- गच्छ्,

पा ----- पिब्,

स्था ----- तिष्ठ्,

दृश् ----- पश्य्,

प्रच्छ् ----- पृच्छ्,

दा ----- यच्छ्

ये सभी धातुएँ लृट् लकार में अपने मूल रूप में वापस आ जाती हैं!

(3) लङ् लकार (अनद्यतन भूतकाल - कार्य बीते हुए समय में हो चुका)

  • पहचान: धातु के आरम्भ में 'अ' (अट् आगम) जुड़ता है और यदि धातु का पहला वर्ण स्वर हो, तो वृद्धि सन्धि होकर 'आ' / 'ऐ' / 'औ' बन जाता है।

जैसे— अ + अस् = आसीत्

अ + इष् = ऐच्छत्

पुरुषःपरस्मैपद स्मरण-सूत्र
(एक / द्वि / बहु)
आत्मनेपद स्मरण-सूत्र
(एक / द्वि / बहु)
प्रथम पुरुषःअ+....+अत् / -अताम् / -अन्
(अपठत्, अपठताम्, अपठन्)
अ+....+अत / -एताम् / -अन्त
(असेवत, असेवेताम्, असेवन्त)
मध्यम पुरुषःअ+....+अः / -अतम् / -अत
(अपठः, अपठतम्, अपठत)
अ+....+अथाः / -एथाम् / -अध्वम्
(असेवथाः, असेवेथाम्, असेवध्वम्)
उत्तम पुरुषःअ+....+अम् / -आव / -आम
(अपठम्, अपठाव, अपठाम)
अ+....+ए / -आवहि / -आमहि
(असेवे, असेवावहि, असेवामहि)

विशेष ध्यान दें (हलन्त का अन्तर):

परस्मैपद लङ् लकार के प्रथम पुरुष एकवचन में अंत में हलन्त 'त्' होता है (अपठत् = उसने पढ़ा), जबकि मध्यम पुरुष बहुवचन में हलन्त नहीं होता, पूरा 'त' होता है (अपठत = तुम सबने पढ़ा)!

उपसर्ग युक्त धातुओं में लङ् लकार का नियम: यदि धातु से पहले कोई उपसर्ग जुड़ा हो, तो भूतकाल का 'अ' उपसर्ग के पहले नहीं, बल्कि उपसर्ग और धातु के बीच में लगता है!

  • जैसे— आ + गम् (लङ् लकार):

आ + अगच्छत् = आगच्छत् (अआगच्छत् अशुद्ध है!)।

    • प्रति + वद् (लङ् लकार)

प्रति + अवदत् (यण् सन्धि) = प्रत्यवदत्।

    • अनु + कृ (लङ् लकार)

अनु + अकरोत् (यण् सन्धि) = अन्वकरोत्।

(4) लोट् लकार (आज्ञा, प्रार्थना, आशीर्वाद या अनुमति अर्थ में)

  • पहचान: हिन्दी वाक्यों में 'पढ़ो, जाओ, वह पढ़े, मैं बोलूँ, सदा सुखी रहो' जैसे भाव होते हैं।
पुरुषःपरस्मैपद स्मरण-सूत्र
(एक / द्वि / बहु)
आत्मनेपद स्मरण-सूत्र
(एक / द्वि / बहु)
प्रथम पुरुषः-अतु / -अताम् / -अन्तु
(पठतु, पठताम्, पठन्तु)
-अताम् / -एताम् / -अन्ताम्
(सेवताम्, सेवेताम्, सेवन्ताम्)
मध्यम पुरुषः-अ (मूल रूप) / -अतम् / -अत
(पठ, पठतम्, पठत)
-अस्व / -एथाम् / -अध्वम्
(सेवस्व, सेवेथाम्, सेवध्वम्)
उत्तम पुरुषः-आनि / -आव / -आम
(पठानि, पठाव, पठाम)
-ऐ / -आवहै / -आमहै
(सेवै, सेवावहै, सेवामहै)

विशेष ध्यान दें: लोट् लकार में कहीं भी विसर्ग (ः) नहीं आता है! (पठानि, पठाव, पठाम — यदि विसर्ग लगा दिया तो लट् लकार बन जाएगा!) तथा मध्यम पुरुष एकवचन में कोई प्रत्यय नहीं दिखता, केवल विकरण सहित धातु रहती है (पठ, गच्छ, लिख, पश्य, तिष्ठ)।

(5) विधिलिङ् लकार (चाहिए, उपदेश, कर्तव्य या सम्भावना अर्थ में)

  • पहचान: हिन्दी वाक्यों में 'पढ़ना चाहिए, जाना चाहिए, सत्य बोलना चाहिए' जैसे भाव होते हैं।
पुरुषःपरस्मैपद स्मरण-सूत्र
(एक / द्वि / बहु)
आत्मनेपद स्मरण-सूत्र
(एक / द्वि / बहु)
प्रथम पुरुषः-एत् / -एताम् / -एयुः
(पठेत्, पठेताम्, पठेयुः)
-एत / -एयाताम् / -एरन्
(सेवेत, सेवेयाताम्, सेवेरन्)
मध्यम पुरुषः-एः / -एतम् / -एत
(पठेः, पठेतम्, पठेत)
-एथाः / -एयाथाम् / -एध्वम्
(सेवेथाः, सेवेयाथाम्, सेवेध्वम्)
उत्तम पुरुषः-एयम् / -एव / -एम
(पठेयम्, पठेव, पठेम)
-एय / -एवहि / -एमहि
(सेवेय, सेवेवहि, सेवेमहि)

3. परिवर्तनीय एवं विशेष धातुओं की मास्टर सारणी (लट् बनाम लृट् लकार)

परीक्षा में सबसे अधिक प्रश्न उन्हीं धातुओं से पूछे जाते हैं जिनका रूप बदलता है या जिनके लृट् लकार में संयुक्ताक्षर (क्ष्य / स्य / ष्य) बनते हैं। नीचे दी गई सारणी को अवश्य कण्ठस्थ करें:

मूल धातुःहिन्दी अर्थलट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ् में आदेशलट् लकार
(प्र.पु. एक.)
लृट् लकार
(प्र.पु. एक.) — विशेष रूप
गम्जानागच्छ्गच्छतिगमिष्यति
(गच्छिष्यति अशुद्ध है!)
पापीनापिब्पिबतिपास्यति
(पिबिष्यति अशुद्ध है!)
स्थाठहरना / बैठनातिष्ठ्तिष्ठतिस्थास्यति
(तिष्ठिष्यति अशुद्ध है!)
दृश्देखनापश्य्पश्यतिद्रक्ष्यति
(पश्यिष्यति अशुद्ध है!)
प्रच्छ्पूछनापृच्छ्पृच्छतिप्रक्ष्यति
(पृच्छिष्यति अशुद्ध है!)
दा (यच्छ्)देनायच्छ् / दद्यच्छति / ददातिदास्यति
इष्चाहनाइच्छ्इच्छतिएषिष्यति
घ्रासूँघनाजिघ्र्जिघ्रतिघ्रास्यति
सद्बैठना / दुखी होनासीद्सीदतिसत्स्यति
नम्झुकना / नमस्कार करनानम्
(अपरिवर्तित)
नमतिनंस्यति
नीले जानानय्नयतिनेष्यति
भूहोनाभव्भवतिभविष्यति
स्मृयाद करनास्मर्स्मरतिस्मरिष्यति
कृकरनाकर् / कुरुकरोतिकरिष्यति
शक्सकना (समर्थ होना)शक्नु / शक्नोशक्नोतिशक्ष्यति
आप्प्राप्त करनाआप्नु / आप्नोआप्नोतिआप्स्यति
श्रुसुननाशृणु / शृणोशृणोतिश्रोष्यति
ज्ञाजाननाजाना / जानीजानातिज्ञास्यति
क्रीखरीदनाक्रीणा / क्रीणीक्रीणातिक्रेष्यति
ग्रह्पकड़ना / ग्रहण करनागृह्णा / गृह्णीगृह्णातिग्रहीष्यति (दीर्घ ई!)
पच्पकानापच्पचतिपक्ष्यति
त्यज्त्यागना / छोड़नात्यज्त्यजतित्यक्ष्यति
नश्नष्ट होनानश्य्नश्यतिनशिष्यति / नङ्क्ष्यति
नृत्नाचनानृत्य्नृत्यतिनर्तिष्यति
लभ् (आत्मने.)पानालभ्लभतेलप्स्यते
सेव् (आत्मने.)सेवा करनासेव्सेवतेसेविष्यते
रुच् (आत्मने.)अच्छा लगनारोच्रोचतेरोचिष्यते
वृध् (आत्मने.)बढ़नावर्ध्वर्धतेवर्धिष्यते (या वर्त्स्यति)
सह् (आत्मने.)सहनासह्सहतेसहिष्यते
जन् (आत्मने.)उत्पन्न होनाजाय्जायतेजनिष्यते

4. परस्मैपदी धातुओं के विस्तृत रूप (पाँचों लकारों में सम्पूर्ण तालिकाएँ)

(1) 'पठ्' धातु (अर्थ: पढ़ना — भ्वादिगण, परस्मैपद)

लट् लकार (वर्तमान काल) एवं लृट् लकार (भविष्यत् काल)

पुरुषःलट् लकार
(एक / द्वि / बहु)
लृट् लकार
(एक / द्वि / बहु)
प्रथम पुरुषःपठति / पठतः / पठन्तिपठिष्यति / पठिष्यतः / पठिष्यन्ति
मध्यम पुरुषःपठसि / पठथः / पठथपठिष्यसि / पठिष्यथः / पठिष्यथ
उत्तम पुरुषःपठामि / पठावः / पठामःपठिष्यामि / पठिष्यावः / पठिष्यामः

लङ् लकार (भूतकाल), लोट् लकार (आज्ञार्थ) एवं विधिलिङ् लकार (चाहिए अर्थ)

पुरुषःलङ् लकार
(एक / द्वि / बहु)
लोट् लकार
(एक / द्वि / बहु)
विधिलिङ् लकार
(एक / द्वि / बहु)
प्रथम पुरुषःअपठत् / अपठताम् / अपठन्पठतु / पठताम् / पठन्तुपठेत् / पठेताम् / पठेयुः
मध्यम पुरुषःअपठः / अपठतम् / अपठतपठ / पठतम् / पठतपठेः / पठेतम् / पठेत
उत्तम पुरुषःअपठम् / अपठाव / अपठामपठानि / पठाव / पठामपठेयम् / पठेव / पठेम

'पठ्' के समान चलने वाली अपरिवर्तनीय धातुओं की सम्पूर्ण सूची:

  • हस् (हँसना — हसति, हसिष्यति, अहसत्, हसतु, हसेत्),
  • चल् (चलना — चलति, चलिष्यति),
  • खेल् (खेलना — खेलति, खेलिष्यति),
  • क्रीड् (खेलना — क्रीडति, क्रीडिष्यति),
  • वद् (बोलना — वदति, वदिष्यति),
  • खाद् (खाना — खादति, खादिष्यति),
  • धाव् (दौड़ना — धावति, धाविष्यति),
  • पत् (गिरना — पतति, पतिष्यति),
  • रक्ष् (रक्षा करना — रक्षति, रक्षिष्यति),
  • भ्रम् (घूमना — भ्रमति, भ्रमिष्यति),
  • गर्ज् (गरजना — गर्जति, गर्जिष्यति),
  • कूज् (चहचहाना — कूजति),
  • तर् / तृ (तैरना — तरति, तरिष्यति),
  • चर् (चरना/आचरण करना — चरति, चरिष्यति),
  • ज्वल् (जलना — ज्वलति),
  • फल् (फलना — फलति),
  • जीव् (जीना — जीवति, जीविष्यति),
  • अर्च् (पूजा करना — अर्चति, लङ्: आर्चत्),
  • यज् (यज्ञ करना — यजति, लृट्: यक्ष्यति),
  • वस् (रहना — वसति, ध्यान दें लृट् लकार में: वत्स्यति!),
  • लिख् (लिखना — लिखति, ध्यान दें लृट् लकार में 'इ' को गुण 'ए' होकर: लेखिष्यति!),
  • मिल् (मिलना — मिलति, लृट्: मेलिष्यति)।

(2) 'गम्' (गच्छ्) धातु (अर्थ: जाना) एवं 'दृश्' (पश्य्) धातु (अर्थ: देखना)

लकारः / पुरुषः'गम्' (गच्छ्) धातु
(एक / द्वि / बहु)
'दृश्' (पश्य्) धातु
(एक / द्वि / बहु)
लट्
लट् - प्र.पु.गच्छति / गच्छतः / गच्छन्तिपश्यति / पश्यतः / पश्यन्ति
लट् - म.पु.गच्छसि / गच्छथः / गच्छथपश्यसि / पश्यथः / पश्यथ
लट् - उ.पु.गच्छामि / गच्छावः / गच्छामःपश्यामि / पश्यावः / पश्यामः
लृट्
लृट् - प्र.पु.गमिष्यति / गमिष्यतः / गमिष्यन्तिद्रक्ष्यति / द्रक्ष्यतः / द्रक्ष्यन्ति
लृट् - म.पु.गमिष्यसि / गमिष्यथः / गमिष्यथद्रक्ष्यसि / द्रक्ष्यथः / द्रक्ष्यथ
लृट् - उ.पु.गमिष्यामि / गमिष्यावः / गमिष्यामःद्रक्ष्यामि / द्रक्ष्यावः / द्रक्ष्यामः
लङ्
लङ् - प्र.पु.अगच्छत् / अगच्छताम् / अगच्छन्अपश्यत् / अपश्यताम् / अपश्यन्
लङ् - म.पु.अगच्छः / अगच्छतम् / अगच्छतअपश्यः / अपश्यतम् / अपश्यत
लङ् - उ.पु.अगच्छम् / अगच्छाव / अगच्छामअपश्यम् / अपश्याव / अपश्याम
लोट्
लोट् - प्र.पु.गच्छतु / गच्छताम् / गच्छन्तुपश्यतु / पश्यताम् / पश्यन्तु
लोट् - म.पु.गच्छ / गच्छतम् / गच्छतपश्य / पश्यतम् / पश्यत
लोट् - उ.पु.गच्छानि / गच्छाव / गच्छामपश्यानि / पश्याव / पश्याम
विधिलिङ्
विधिलिङ् - प्र.पु.गच्छेत् / गच्छेताम् / गच्छेयुःपश्येत् / पश्येताम् / पश्येयुः
विधिलिङ् - म.पु.गच्छेः / गच्छेतम् / गच्छेतपश्येः / पश्येतम् / पश्येत
विधिलिङ् - उ.पु.गच्छेयम् / गच्छेव / गच्छेमपश्येयम् / पश्येव / पश्येम

(3) 'पा' (पिब् - पीना), 'स्था' (तिष्ठ् - ठहरना) एवं 'प्रच्छ्' (पृच्छ् - पूछना)

(नोट: इनके लट्, लङ्, लोट् और विधिलिङ् रूप बिल्कुल 'पठ्/गच्छ्' की तरह पिबति, तिष्ठति, पृच्छति चलते हैं। नीचे मुख्य रूपों की तुलना देखें)

लकारः / पुरुषः'पा' (पिब्)
पीना
'स्था' (तिष्ठ्)
ठहरना
'प्रच्छ्' (पृच्छ्)
पूछना
लट् (प्र.पु.)पिबति / पिबतः / पिबन्तितिष्ठति / तिष्ठतः / तिष्ठन्तिपृच्छति / पृच्छतः / पृच्छन्ति
लृट् (प्र.पु.)पास्यति / पास्यतः / पास्यन्तिस्थास्यति / स्थास्यतः / स्थास्यन्तिप्रक्ष्यति / प्रक्ष्यतः / प्रक्ष्यन्ति
लृट् (उ.पु.)पास्यामि / पास्यावः / पास्यामःस्थास्यामि / स्थास्यावः / स्थास्यामःप्रक्ष्यामि / प्रक्ष्यावः / प्रक्ष्यामः
लङ् (प्र.पु.)अपिबत् / अपिबताम् / अपिबन्अतिष्ठत् / अतिष्ठताम् / अतिष्ठन्अपृच्छत् / अपृच्छताम् / अपृच्छन्
लोट् (प्र.पु.)पिबतु / पिबताम् / पिबन्तुतिष्ठतु / तिष्ठताम् / तिष्ठन्तुपृच्छतु / पृच्छताम् / पृच्छन्तु
लोट् (म.पु.)पिब / पिबतम् / पिबततिष्ठ / तिष्ठतम् / तिष्ठतपृच्छ / पृच्छतम् / पृच्छत
विधिलिङ् (प्र.पु.)पिबेत् / पिबेताम् / पिबेयुःतिष्ठेत् / तिष्ठेताम् / तिष्ठेयुःपृच्छेत् / पृच्छेताम् / पृच्छेयुः

(4) 'भू' (होना - भव्), 'नी' (ले जाना - नय्) एवं 'नम्' (नमस्कार करना)

लकारः
/ पुरुषः
'भू' (भव्)
होना
'नी' (नय्)
ले जाना
'नम्'
झुकना / प्रणाम करना
लट् (प्र.पु.)भवति / भवतः / भवन्तिनयति / नयतः / नयन्तिनमति / नमतः / नमन्ति
लट् (उ.पु.)भवामि / भवावः / भवामःनयामि / नयावः / नयामःनमामि / नमावः / नमामः
लृट् (प्र.पु.)भविष्यति / भविष्यतः / भविष्यन्तिनेष्यति / नेष्यतः / नेष्यन्तिनंस्यति / नंस्यतः / नंस्यन्ति
लङ् (प्र.पु.)अभवत् / अभवताम् / अभवन्अनयत् / अनयताम् / अनयन्अनमत् / अनमताम् / अनमन्
लोट् (प्र.पु.)भवतु / भवताम् / भवन्तुनयतु / नयताम् / नयन्तुनमतु / नमताम् / नमन्तु
विधिलिङ् (प्र.पु.)भवेत् / भवेताम् / भवेयुःनयेत् / नयेताम् / नयेयुःनमेत् / नमेताम् / नमेयुः

(5) अति महत्त्वपूर्ण विशेष धातु: 'अस्' (होना — अदादिगण) एवं 'कृ' (करना — तनादिगण)

(चेतावनी: 'अस्' और 'कृ' के रूप सामान्य नियम से भिन्न चलते हैं और परीक्षा में हर वर्ष इनमें से प्रश्न अवश्य आते हैं! नोट: 'अस्' धातु के लृट् लकार के रूप 'भू' धातु के समान 'भविष्यति' ही चलते हैं।)

(क) 'अस्' धातु (अर्थ: होना) — पाँचों लकारों में सम्पूर्ण रूप

लकारःपुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
लट् लकार
(वर्तमान काल)
प्रथम पुरुषःअस्तिस्तःसन्ति
मध्यम पुरुषःअसिस्थःस्थ
उत्तम पुरुषःअस्मिस्वःस्मः
लृट् लकार
(भू के समान)
प्रथम पुरुषःभविष्यतिभविष्यतःभविष्यन्ति
मध्यम पुरुषःभविष्यसिभविष्यथःभविष्यथ
उत्तम पुरुषःभविष्यामिभविष्यावःभविष्यामः
लङ् लकार
(भूतकाल)
प्रथम पुरुषःआसीत्आस्ताम्आसन्
मध्यम पुरुषःआसीःआस्तम्आस्त
उत्तम पुरुषःआसम्आस्वआस्म
लोट् लकार
(आज्ञार्थ)
प्रथम पुरुषःअस्तुस्ताम्सन्तु
मध्यम पुरुषःएधिस्तम्स्त
उत्तम पुरुषःअसानिअसावअसाम
विधिलिङ्
(चाहिए अर्थ)
प्रथम पुरुषःस्यात्स्याताम्स्युः
मध्यम पुरुषःस्याःस्यातम्स्यात
उत्तम पुरुषःस्याम्स्यावस्याम

(ख) 'कृ' धातु (अर्थ: करना) — पाँचों लकारों में सम्पूर्ण परस्मैपदी रूप

लकारःपुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
लट् लकार
(वर्तमान काल)
प्रथम पुरुषःकरोतिकुरुतःकुर्वन्ति
मध्यम पुरुषःकरोषिकुरुथःकुरुथ
उत्तम पुरुषःकरोमिकुर्वः (कुरुवः नहीं!)कुर्मः (कुरुमः नहीं!)
लृट् लकार
(भविष्यत् काल)
प्रथम पुरुषःकरिष्यतिकरिष्यतःकरिष्यन्ति
मध्यम पुरुषःकरिष्यसिकरिष्यथःकरिष्यथ
उत्तम पुरुषःकरिष्यामिकरिष्यावःकरिष्यामः
लङ् लकार
(भूतकाल)
प्रथम पुरुषःअकरोत्अकुरुताम्अकुर्वन्
मध्यम पुरुषःअकरोःअकुरुतम्अकुरुत
उत्तम पुरुषःअकरवम्अकुर्वअकुर्म
लोट् लकार
(आज्ञार्थ)
प्रथम पुरुषःकरोतुकुरुताम्कुर्वन्तु
मध्यम पुरुषःकुरुकुरुतम्कुरुत
उत्तम पुरुषःकरवाणि ('र' के कारण 'न' का 'ण'!)करवावकरवाम
विधिलिङ्
(चाहिए अर्थ)
प्रथम पुरुषःकुर्यात्कुर्याताम्कुर्युः
मध्यम पुरुषःकुर्याःकुर्यातम्कुर्यात
उत्तम पुरुषःकुर्याम्कुर्यावकुर्याम

(6) स्वादिगण की धातुएँ: 'शक्' (सकना), 'आप्' (पाना) एवं 'श्रु' (सुनना)

(इनमें बीच में 'नु/नो' जुड़ता है। 'श्रु' को 'शृ' आदेश होता है और 'ृ' के कारण 'न' का 'ण' होकर 'शृणोति' बनता है। उत्तम पुरुष द्विवचन और बहुवचन में 'उ' का लोप भी विकल्प से होता है— शृणुवः/शृण्वः, शृणुमः/शृण्मः; पर 'शक्' और 'आप्' में केवल शक्नुवः, शक्नुमः, आप्नुवः, आप्नुमः ही शुद्ध हैं)

लकारः / पुरुषः'शक्' (सकना) एवं 'आप्' (पाना)'श्रु' (सुनना — शृणु/शृणो)
लट् - प्र.पु.शक्नोति / शक्नुतः / शक्नुवन्ति
(आप्नोति / आप्नुतः / आप्नुवन्ति)
शृणोति / शृणुतः / शृण्वन्ति
लट् - म.पु.शक्नोषि / शक्नुथः / शक्नुथशृणोषि / शृणुथः / शृणुथ
लट् - उ.पु.शक्नोमि / शक्नुवः / शक्नुमःशृणोमि / शृण्वः (शृणुवः) / शृण्मः (शृणुमः)
लृट् - प्र.पु.शक्ष्यति / शक्ष्यतः / शक्ष्यन्ति
(आप्स्यति / आप्स्यतः / आप्स्यन्ति)
श्रोष्यति / श्रोष्यतः / श्रोष्यन्ति
लङ् - प्र.पु.अशक्नोत् / अशक्नुताम् / अशक्नुवन्
(आप्: आप्नोत् / आप्नुताम् / आप्नुवन्)
अशृणोत् / अशृणुताम् / अशृण्वन्
लङ् - म.पु.अशक्नोः / अशक्नुतम् / अशक्नुतअशृणोः / अशृणुतम् / अशृणुत
लङ् - उ.पु.अशक्नवम् / अशक्नुव / अशक्नुमअशृणवम् / अशृण्व / अशृण्म
लोट् - प्र.पु.शक्नोतु / शक्नुताम् / शक्नुवन्तुशृणोतु / शृणुताम् / शृण्वन्तु
लोट् - म.पु.शक्नुहि / शक्नुतम् / शक्नुत (आप्नुहि)शृणु / शृणुतम् / शृणुत
लोट् - उ.पु.शक्नवानि / शक्नवाव / शक्नवामशृणवानि / शृणवाव / शृणवाम
विधिलिङ् - प्र.पु.शक्नुयात् / शक्नुयाताम् / शक्नुयुः (आप्नुयात्)शृणुयात् / शृणुयाताम् / शृणुयुः

(7) क्र्यादिगण एवं जुहोत्यादिगण: 'ज्ञा' (जानना) एवं 'दा' (देना - ददाति व यच्छति)

(नोट: 'दा' धातु के रूप भ्वादिगण में 'यच्छति' के समान सरल चलते हैं, और जुहोत्यादिगण में 'ददाति' के समान चलते हैं। परीक्षा में दोनों में से कोई भी पूछा जा सकता है।)

लकारः / पुरुषः'ज्ञा'
(जानना- क्र्यादिगण)
'दा'
(देना - जुहोत्यादिगण विशेष रूप)
'दा'
(यच्छ् — भ्वादिगण सरल रूप)
लट् - प्र.पु.जानाति / जानीतः / जानन्तिददाति / दत्तः / ददतियच्छति / यच्छतः / यच्छन्ति
लट् - म.पु.जानासि / जानीथः / जानीथददासि / दत्थः / दत्थयच्छसि / यच्छथः / यच्छथ
लट् - उ.पु.जानामि / जानीवः / जानीमःददामि / दद्वः / दद्मःयच्छामि / यच्छावः / यच्छामः
लृट् - प्र.पु.ज्ञास्यति / ज्ञास्यतः / ज्ञास्यन्तिदास्यति / दास्यतः / दास्यन्तिदास्यति / दास्यतः / दास्यन्ति
लङ् - प्र.पु.अजानात् / अजानीताम् / अजानन्अददात् / अदत्ताम् / अददुःअयच्छत् / अयच्छताम् / अयच्छन्
लोट् - प्र.पु.जानातु / जानीताम् / जानन्तुददातु / दत्ताम् / ददतुयच्छतु / यच्छताम् / यच्छन्तु
लोट् - म.पु.जानीहि / जानीतम् / जानीतदेहि / दत्तम् / दत्तयच्छ / यच्छतम् / यच्छत
लोट् - उ.पु.जानानि / जानाव / जानामददानि / ददाव / ददामयच्छानि / यच्छाव / यच्छाम
विधिलिङ् - प्र.पु.जानीयात् / जानीयाताम् / जानीयुःदद्यात् / दद्याताम् / दद्युःयच्छेत् / यच्छेताम् / यच्छेयुः
  • 'ज्ञा' (जानाति) के समान चलने वाली अन्य धातुएँ:

क्री (खरीदना — क्रीणाति, क्रीणीतः, क्रीणन्ति; लोट् म.पु. एकवचन: क्रीणीहि; विधिलिङ्: क्रीणीयात्; लृट्: क्रेष्यति)

ग्रह् (पकड़ना — गृह्णाति, गृह्णीतः, गृह्णन्ति; लृट्: ग्रहीष्यति)।

(8) दिवादिगण एवं चुरादिगण: 'नश्' (नष्ट होना) तथा 'कथ्' / 'चिन्त्' / 'भक्ष्'

  • दिवादिगण ('य' विकरण): नश् (नष्ट होना — नश्यति, नश्यतः, नश्यन्ति; लङ्: अनश्यत्; लोट्: नश्यतु; विधिलिङ्: नश्येत्; लृट्: नशिष्यति / नङ्क्ष्यति), नृत् (नाचना — नृत्यति; लृट्: नर्तिष्यति), क्रुध् (क्रोध करना — क्रुध्यति), स्निह् (स्नेह करना — स्निह्यति), तुष् (सन्तुष्ट होना — तुष्यति), भ्रम् (भ्राम्यति/भ्रमति)।
  • चुरादिगण ('अय' विकरण — लट् से लृट् तक सभी लकारों में 'अय' बना रहता है!):
    • कथ् (कहना): लट् = कथयति, कथयतः, कथयन्ति।
      • लृट् = कथयिष्यति।
      • लङ् = अकथयत्, अकथयताम्, अकथयन्।
      • लोट् = कथयतु (म.पु. एक: कथय, उ.पु. एक: कथयानि)।
      • विधिलिङ् = कथयेत्, कथयेताम्, कथयेयुः।
    • 'कथ्' के समान चलने वाली चुरादिगण की समस्त धातुएँ:
      • चिन्त् (सोचना — चिन्तयति, चिन्तयिष्यति, अचिन्तयत्),
      • भक्ष् (खाना — भक्षयति, भक्षयिष्यति, अभक्षयत्),
      • चुर् (चुराना — चोरयति, चोरयिष्यति, अचोरयत्),
      • पूज् (पूजा करना — पूजयति, पूजयिष्यति),
      • रच् (रचना करना — रचयति, रचयिष्यति),
      • गण् (गिनना — गणयति, गणयिष्यति),
      • पीड् (सताना — पीडयति),
      • दण्ड् (दण्ड देना — दण्डयति),
      • पाल् (पालन करना — पालयति),
      • चाल् (चलाना — चालयति)।

5. आत्मनेपदी धातुओं के विस्तृत रूप (पाँचों लकारों में सम्पूर्ण तालिकाएँ)

कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में आत्मनेपदी धातुओं (विशेषकर सेव्, लभ् और रुच्) के मुख्य रूप से लट् और लृट् लकार (तथा उच्च स्तर पर पाँचों लकार) पूछे जाते हैं। नीचे इनकी सम्पूर्ण तालिकाएँ दी गई हैं:

(1) 'सेव्' धातु (अर्थ: सेवा करना — भ्वादिगण, आत्मनेपद)

लकारःपुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
लट् लकार
(वर्तमान काल)
प्रथम पुरुषःसेवतेसेवेतेसेवन्ते
मध्यम पुरुषःसेवसेसेवेथेसेवध्वे
उत्तम पुरुषःसेवेसेवावहेसेवामहे
लृट् लकार
(भविष्यत् काल)
प्रथम पुरुषःसेविष्यतेसेविष्येतेसेविष्यन्ते
मध्यम पुरुषःसेविष्यसेसेविष्येथेसेविष्यध्वे
उत्तम पुरुषःसेविष्येसेविष्यावहेसेविष्यामहे
लङ् लकार
(भूतकाल)
प्रथम पुरुषःअसेवत (हलन्त नहीं!)असेवेताम्असेवन्त
मध्यम पुरुषःअसेवथाःअसेवेथाम्असेवध्वम्
उत्तम पुरुषःअसेवेअसेवावहिअसेवामहि
लोट् लकार
(आज्ञार्थ)
प्रथम पुरुषःसेवताम्सेवेताम्सेवन्ताम्
मध्यम पुरुषःसेवस्वसेवेथाम्सेवध्वम्
उत्तम पुरुषःसेवैसेवावहैसेवामहै
विधिलिङ्
(चाहिए अर्थ)
प्रथम पुरुषःसेवेतसेवेयाताम्सेवेरन्
मध्यम पुरुषःसेवेथाःसेवेयाथाम्सेवेध्वम्
उत्तम पुरुषःसेवेयसेवेवहिसेवेमहि

(2) 'लभ्' (पाना) एवं 'रुच्' (अच्छा लगना) — आत्मनेपद तुलनात्मक तालिका

(ध्यान दें: 'लभ्' के लट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ् बिल्कुल 'सेव्' के समान चलते हैं, केवल लृट् लकार में 'भ् + स्य' मिलकर 'प्स्य' (लप्स्यते) बन जाता है! 'रुच्' में 'उ' को गुण 'ओ' होकर रोचते बनता है।)

लकारः / पुरुषः'लभ्' (पाना)
(लभते / लप्स्यते)
'रुच्' (अच्छा लगना)
(रोचते / रोचिष्यते)
लट् - प्र.पु.लभते / लभेते / लभन्तेरोचते / रोचेते / रोचन्ते
लट् - म.पु.लभसे / लभेथे / लभध्वेरोचसे / रोचेथे / रोचध्वे
लट् - उ.पु.लभे / लभावहे / लभामहेरोचे / रोचावहे / रोचामहे
लृट् - प्र.पु.लप्स्यते / लप्स्येते / लप्स्यन्तेरोचिष्यते / रोचिष्येते / रोचिष्यन्ते
लृट् - म.पु.लप्स्यसे / लप्स्येथे / लप्स्यध्वेरोचिष्यसे / रोचिष्येथे / रोचिष्यध्वे
लृट् - उ.पु.लप्स्ये / लप्स्यावहे / लप्स्यामहेरोचिष्ये / रोचिष्यावहे / रोचिष्यामहे
लङ् - प्र.पु.अलभत / अलभेताम् / अलभन्तअरोचत / अरोचेताम् / अरोचन्त
लोट् - प्र.पु.लभताम् / लभेताम् / लभन्ताम्रोचताम् / रोचेताम् / रोचन्ताम्
लोट् - म.पु.लभस्व / लभेथाम् / लभध्वम्रोचस्व / रोचेथाम् / रोचध्वम्
विधिलिङ् - प्र.पु.लभेत / लभेयाताम् / लभेरन्रोचेत / रोचेयाताम् / रोचेरन्

'सेव् / लभ् / रुच्' के समान चलने वाली समस्त आत्मनेपदी धातुओं की सूची:

  • 'सेव्' के समान:
    • वन्द् (वन्दना करना — वन्दते, वन्दिष्यते, अवन्दत),
    • भाष् (बोलना — भाषते, भाषिष्यते),
    • याच् (माँगना — याचते, याचिष्यते),
    • कम्प् (काँपना — कम्पते, कम्पिष्यते),
    • यत् (प्रयत्न करना — यतते, यतिष्यते),
    • सह् (सहन करना — सहते, सहिष्यते),
    • रम् (रमण करना/लगना — रमते, लृट्: रंस्यते),
    • भज् (सेवा/भजन करना — भजते, लृट्: भक्ष्यते),
    • जन् (जन्म लेना/उत्पन्न होना — दिवादिगण में 'जाय' आदेश होकर: जायते, जायेते, जायन्ते; लृट्: जनिष्यते)।
  • 'रुच्' के समान ('उ/ऋ' को गुण होने वाली धातुएँ):
    • मुद् (प्रसन्न होना — मोदते, मोदेते, मोदन्ते; लृट्: मोदिष्यते),
    • शुभ् (सुशोभित होना — शोभते, शोभिष्यते),
    • वृध् (बढ़ना — वर्धते, वर्धेते, वर्धन्ते; लृट्: वर्धिष्यते),
    • वृत् (होना — वर्तते, वर्तिष्यते)।

6. सीबीएसई (एनसीईआरटी) परीक्षा हेतु वाक्य-प्रयोग के अचूक नियम

परीक्षा में वाक्यों के सन्दर्भ में सही क्रियापद चुनने के लिए इन 4 नियमों का प्रयोग करें:

नियम 1: कालबोधक अव्यय शब्दों से लकार की पहचान

वाक्य में दिए गए समय-सूचक अव्यय पद को देखकर तुरंत पहचानें कि कौन-सा लकार लगेगा:

1. 'ह्यः' (बीता हुआ कल) या 'पुरा' (प्राचीन काल में): सदैव लङ् लकार (भूतकाल) लगेगा!

◦ उदाहरण: सः ह्यः ग्रामम् अगच्छत्। (वह कल गाँव गया था।)

2. 'श्वः' (आने वाला कल) या 'आगामि-दिवसे': सदैव लृट् लकार (भविष्यत् काल) लगेगा!

◦ उदाहरण: अहं श्वः जन्तुशालां द्रक्ष्यामि। (मैं कल चिड़ियाघर देखूँगा।)

3. 'अद्य' (आज), 'सम्प्रति / इदानीम् / अधुना' (इस समय), 'सदा / सर्वदा' (हमेशा): प्रायः लट् लकार (वर्तमान काल) लगता है।

◦ उदाहरण: बालकाः अधुना क्रीडन्ति। (बालक इस समय खेल रहे हैं।)

नियम 2: 'स्म' अव्यय का विशेष नियम

यदि वर्तमान काल (लट् लकार) की क्रिया के ठीक बाद 'स्म' अव्यय लगा दिया जाए, तो वह क्रिया भूतकाल (लङ् लकार) का अर्थ देने लगती है!

  • जैसे— पुरा एकः नृपः वसति स्म। = पुरा एकः नृपः अवसत्। (प्राचीन काल में एक राजा रहता था।)
  • परीक्षा में सावधानी: यदि वाक्य में खाली स्थान के बाद पहले से ही 'स्म' लिखा है, तो खाली स्थान में भूलकर भी लङ् लकार ('अवसत्') मत भरिए, वहाँ लट् लकार ('वसति') ही आएगा!

नियम 3: 'भवान् / भवती' का भ्रम दूर करें

हिन्दी में 'आप' (भवान् / भवती) सुनने में मध्यम पुरुष जैसा लगता है, परन्तु संस्कृत व्याकरण में 'भवत्' शब्द प्रथम पुरुष है!

  • अतः त्वम् गच्छसि (तुम जाते हो) होता है, परन्तु भवान् के साथ सदैव प्रथम पुरुष की क्रिया आएगी— भवान् गच्छति, भवन्तौ गच्छतः, भवन्तः गच्छन्ति!

नियम 4: संयुक्त कर्ता होने पर क्रिया का पुरुष और वचन

  • यदि वाक्य में दो एकवचन के कर्ता 'च' (और) से जुड़े हों, तो क्रिया द्विवचन में होगी: रामः श्यामः च पठतः।
  • यदि वाक्य में उत्तम पुरुष ('अहम्') और प्रथम/मध्यम पुरुष साथ हों, तो क्रिया उत्तम पुरुष बहुवचन/द्विवचन में होगी: त्वम् अहं च पठावः। (तुम और मैं पढ़ते हैं)।

7. विस्तृत अभ्यास के प्रश्न (वर्णनात्मक अभ्यास - उत्तर सहित)

अभ्यासः 1: अधोलिखित-तिङन्तपदानां मूलधातुं, लकारं, पुरुषं, वचनं च लिखत—

(निम्नलिखित क्रियापदों की मूल धातु, लकार, पुरुष और वचन लिखिए)

क्र.सं.क्रियापदम्मूलधातुःलकारःपुरुषःवचनम्
1.द्रक्ष्यति
2.आसन्
3.स्युः
4.कुर्वः
5.करवाणि
6.लप्स्यन्ते
7.तिष्ठेयुः
8.शक्नुवन्ति
9.जानीहि
10.प्रक्ष्यसि

उत्तराणि (अभ्यासः 1):

क्र.सं.क्रियापदम्मूलधातुःलकारःपुरुषःवचनम्
1.द्रक्ष्यतिदृश्लृट् लकारःप्रथम पुरुषःएकवचनम्
2.आसन्अस्लङ् लकारःप्रथम पुरुषःबहुवचनम्
3.स्युःअस्विधिलिङ् लकारःप्रथम पुरुषःबहुवचनम्
4.कुर्वःकृलट् लकारःउत्तम पुरुषःद्विवचनम्
5.करवाणिकृलोट् लकारःउत्तम पुरुषःएकवचनम्
6.लप्स्यन्तेलभ्लृट् लकारःप्रथम पुरुषःबहुवचनम्
7.तिष्ठेयुःस्थाविधिलिङ् लकारःप्रथम पुरुषःबहुवचनम्
8.शक्नुवन्तिशक्लट् लकारःप्रथम पुरुषःबहुवचनम्
9.जानीहिज्ञालोट् लकारःमध्यम पुरुषःएकवचनम्
10.प्रक्ष्यसिप्रच्छ्लृट् लकारःमध्यम पुरुषःएकवचनम्

अभ्यासः 2: कोष्ठकनिर्देशानुसारं उचितं धातुरूपं निर्माय रिक्तस्थानानि पूरयत—

(कोष्ठक में दिए गए निर्देश के अनुसार उचित धातु रूप बनाकर रिक्त स्थान भरिए — सीबीएसई परीक्षा स्तर)

1. वयं श्वः संस्कृतं .................... (पठ् - लृट् लकारे)।

2. पुरा अत्र एकः मुनिः .................... (वस् - लङ् लकारे)।

3. हे छात्राः! यूयं सदा सत्यं .................... (वद् - लोट् लकारे)।

4. बालकाय मोदकं .................... (रुच् - लट् लकारे)।

5. सर्वे जनाः देशं .................... (सेव् - विधिलिङ् लकारे)।

6. त्वं कुत्र .................... (गम् - लट् लकारे)?

7. भवान् अत्र आसनं .................... (ग्रह् / स्था - लोट् लकारे)।

8. अहं ह्यः चलच्चित्रं .................... (दृश् - लङ् लकारे)।

9. शिष्याः गुरोः आज्ञां .................... (श्रु - लोट् लकारे)।

10. परिश्रमेण एव छात्राः सफलतां .................... (लभ् - लृट् लकारे)।

उत्तराणि (अभ्यासः 2):

1. पठिष्यामः (कर्ता 'वयम्' उत्तम पुरुष बहुवचन है और 'श्वः' से लृट् लकार)।

2. अवसत् (कर्ता 'मुनिः' प्रथम पुरुष एकवचन है)।

3. वदत (कर्ता 'यूयम्' मध्यम पुरुष बहुवचन है; लोट् लकार में हलन्त या विसर्ग नहीं आता)।

4. रोचते ('मोदकम्' एकवचन है, अतः आत्मनेपद प्रथम पुरुष एकवचन)।

5. सेवेरन् ('सर्वे जनाः' प्रथम पुरुष बहुवचन है; आत्मनेपद विधिलिङ् बहुवचन में '-एरन्' जुड़ता है)।

6. गच्छसि (कर्ता 'त्वम्' मध्यम पुरुष एकवचन है)।

7. तिष्ठतु (या गृह्णातु — कर्ता 'भवान्' प्रथम पुरुष एकवचन है!)।

8. अपश्यम् (कर्ता 'अहम्' उत्तम पुरुष एकवचन है; लङ् लकार में 'अपश्यम्')।

9. शृण्वन्तु (कर्ता 'शिष्याः' प्रथम पुरुष बहुवचन है)।

10. लप्स्यन्ते (कर्ता 'छात्राः' प्रथम पुरुष बहुवचन है; लभ् का लृट् लकार 'लप्स्यन्ते')।

अभ्यासः 3: वचन-परिवर्तनं लकार-परिवर्तनं वा कुरुत—

1. सः जलं पिबति। (लृट् लकारे परिवर्तयत) ----- उत्तरम्: सः जलं पास्यति।

2. बालकः प्रश्नं पृच्छति। (बहुवचने परिवर्तयत) ----- उत्तरम्: बालकाः प्रश्नं पृच्छन्ति।

3. अहं कार्यं करोमि। (लङ् लकारे परिवर्तयत) ----- उत्तरम्: अहं कार्यं अकरवम्।

4. सः वृक्षं पश्यति। (लोट् लकारे परिवर्तयत) ----- उत्तरम्: सः वृक्षं पश्यतु।

5. नृपः सिंहासने अस्ति। (लङ् लकारे बहुवचने च परिवर्तयत) ----- उत्तरम्: नृपाः सिंहासने आसन्।

बहुविकल्पीय प्रश्न — स्तर 1: आसान (कक्षा 6–8)

आसान स्तर के प्रश्न हिंदी में हैं — नियम और रूपों की सीधी पहचान।

1. संस्कृत में कुल कितने लकार होते हैं?
(क) पाँच
(ख) सात
(ग) दस
(घ) बारह

2. विद्यालयी पाठ्यक्रम के पाँच प्रमुख लकार कौन-से हैं?
(क) लट्, लिट्, लुट्, लेट्, लोट्
(ख) लट्, लृट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ्
(ग) लिट्, लुट्, लेट्, लुङ्, लृङ्
(घ) लङ्, लुङ्, लृङ्, लिट्, लेट्

3. लट् लकार किस काल को बताता है?
(क) भूतकाल
(ख) आज्ञा
(ग) वर्तमान काल
(घ) भविष्यत् काल

4. लृट् लकार किस काल को बताता है?
(क) भविष्यत् काल
(ख) भूतकाल
(ग) वर्तमान काल
(घ) चाहिए अर्थ

5. लङ् लकार किस काल को बताता है?
(क) भूतकाल
(ख) वर्तमान काल
(ग) आज्ञा
(घ) भविष्यत् काल

6. लोट् लकार किस अर्थ में आता है?
(क) वर्तमान काल
(ख) भूतकाल
(ग) भविष्यत् काल
(घ) आज्ञा / प्रार्थना

7. विधिलिङ् लकार किस अर्थ में आता है?
(क) वर्तमान काल
(ख) भविष्यत् काल
(ग) भूतकाल
(घ) चाहिए (विधि)

8. संस्कृत में पुरुष कितने होते हैं?
(क) दो
(ख) तीन
(ग) चार
(घ) एक

9. संस्कृत में वचन कितने होते हैं?
(क) तीन
(ख) चार
(ग) दो
(घ) एक

10. संस्कृत धातुओं के कितने गण हैं?
(क) आठ
(ख) सात
(ग) बारह
(घ) दस

11. ‘भू’ धातु किस गण की है?
(क) तनादिगण
(ख) अदादिगण
(ग) चुरादिगण
(घ) भ्वादिगण

12. ‘पठ्’ धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) पठसि
(ख) पठन्ति
(ग) पठति
(घ) पठामि

13. ‘पठ्’ धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन का रूप है—
(क) पठामः
(ख) पठतः
(ग) पठन्ति
(घ) पठथ

14. ‘पठ्’ धातु, लट् लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) पठावः
(ख) पठामि
(ग) पठति
(घ) पठसि

15. ‘पठ्’ धातु, लट् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) पठसि
(ख) पठथ
(ग) पठति
(घ) पठामि

16. ‘गम्’ धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) गच्छसि
(ख) गमिष्यति
(ग) गमति
(घ) गच्छति

17. ‘पठ्’ धातु, लृट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) अपठत्
(ख) पठिष्यति
(ग) पठेत्
(घ) पठति

18. ‘पठ्’ धातु, लङ् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) पठतु
(ख) पठिष्यति
(ग) अपठत्
(घ) पठेत्

19. ‘पठ्’ धातु, लोट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) पठेत्
(ख) पठति
(ग) पठतु
(घ) अपठत्

20. ‘पठ्’ धातु, विधिलिङ् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) पठति
(ख) अपठत्
(ग) पठतु
(घ) पठेत्

21. ‘अस्’ (होना) धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) भवति
(ख) असति
(ग) अस्ति
(घ) आसीत्

22. ‘अस्’ धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन का रूप है—
(क) स्तः
(ख) सन्ति
(ग) अस्ति
(घ) स्मः

23. ‘भू’ धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) भूति
(ख) अभवत्
(ग) भवामि
(घ) भवति

24. ‘कृ’ (करना) धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) कुरुते
(ख) करति
(ग) करिष्यति
(घ) करोति

25. ‘दृश्’ (देखना) धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) दृशति
(ख) दर्शति
(ग) द्रक्ष्यति
(घ) पश्यति

26. ‘स्था’ (ठहरना) धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) तिष्ठति
(ख) स्थाति
(ग) स्थास्यति
(घ) स्थिति

27. ‘पा’ (पीना) धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) पिबति
(ख) पीयति
(ग) पास्यति
(घ) पाति

28. ‘दा’ (देना) धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का प्रचलित रूप है—
(क) यच्छति
(ख) दयति
(ग) दास्यति
(घ) दाति

29. ‘अहम्’ कर्ता के साथ क्रिया किस पुरुष में होती है?
(क) प्रथम पुरुष
(ख) किसी में भी
(ग) मध्यम पुरुष
(घ) उत्तम पुरुष

30. ‘त्वम्’ कर्ता के साथ क्रिया किस पुरुष में होती है?
(क) उत्तम पुरुष
(ख) प्रथम पुरुष
(ग) किसी में भी
(घ) मध्यम पुरुष

31. ‘सः’ कर्ता के साथ क्रिया किस पुरुष में होती है?
(क) उत्तम पुरुष
(ख) मध्यम पुरुष
(ग) प्रथम पुरुष
(घ) किसी में भी

32. ‘भवान्’ (आप) कर्ता के साथ क्रिया किस पुरुष में होती है?
(क) द्विवचन में
(ख) मध्यम पुरुष
(ग) उत्तम पुरुष
(घ) प्रथम पुरुष

33. ‘लभ्’ (पाना) धातु किस पद की है?
(क) आत्मनेपदी
(ख) परस्मैपदी
(ग) उभयपदी
(घ) कोई नहीं

34. ‘सेव्’ धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) सेवति
(ख) सेवते
(ग) सेविष्यते
(घ) सेवामि

35. ‘लभ्’ धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है—
(क) लभसे
(ख) लभते
(ग) लप्स्यते
(घ) लभति

36. ‘पठ्’ धातु, लट् लकार, प्रथम पुरुष, द्विवचन का रूप है—
(क) पठतः
(ख) पठावः
(ग) पठन्ति
(घ) पठथः

37. ‘पठ्’ धातु, लट् लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन का रूप है—
(क) पठावः
(ख) पठथ
(ग) पठन्ति
(घ) पठामः

38. लट् लकार की क्रिया के साथ ‘स्म’ जोड़ने पर किस काल का अर्थ आता है?
(क) आज्ञा
(ख) भविष्यत् काल
(ग) वर्तमान काल
(घ) भूतकाल

39. ‘श्वः’ (आने वाला कल) शब्द के साथ कौन-सा लकार प्रयोग होता है?
(क) लङ्
(ख) लट्
(ग) लृट्
(घ) लोट्

40. ‘ह्यः’ (बीता हुआ कल) शब्द के साथ कौन-सा लकार प्रयोग होता है?
(क) विधिलिङ्
(ख) लृट्
(ग) लोट्
(घ) लङ्

इस स्तर के उत्तर और कारण लेख के अंत में ‘उत्तर कुंजी’ में दिए गए हैं — पहले ख़ुद हल करें, फिर मिलाएँ।

बहुविकल्पीय प्रश्न — स्तर 2: मध्यम (कक्षा 9–10, बोर्ड परीक्षा)

मध्यमस्तरीयाः प्रश्नाः संस्कृतभाषायाम् — बोर्ड-परीक्षायाः प्रारूपानुसारम्।

1. ‘गम्’ धातोः लृट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) गच्छिष्यति
(ख) गमिष्यति
(ग) गच्छेत्
(घ) अगच्छत्

2. ‘कृ’ धातोः लृट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) अकरोत्
(ख) करोष्यति
(ग) करिष्यति
(घ) कृष्यति

3. ‘भू’ धातोः लङ्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) भवेत्
(ख) भविष्यति
(ग) अभवत्
(घ) भवतु

4. ‘अस्’ धातोः लङ्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) स्यात्
(ख) अस्तु
(ग) आसीत्
(घ) अस्ति

5. ‘अस्’ धातोः लोट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) अस्तु
(ख) सन्तु
(ग) आसीत्
(घ) स्यात्

6. ‘अस्’ धातोः विधिलिङ्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) आसीत्
(ख) स्युः
(ग) स्यात्
(घ) अस्तु

7. ‘अस्’ धातोः लृट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) असिष्यति
(ख) भविष्यति
(ग) आसीत्
(घ) अस्यति

8. ‘कृ’ धातोः लङ्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) कुर्यात्
(ख) करोतु
(ग) अकरत्
(घ) अकरोत्

9. ‘कृ’ धातोः लोट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) अकरोत्
(ख) कुर्यात्
(ग) करतु
(घ) करोतु

10. ‘कृ’ धातोः विधिलिङ्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) कुर्यः
(ख) करोतु
(ग) कुर्यात्
(घ) करेत्

11. ‘पठ्’ धातोः लङ्लकारे उत्तमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) अपठाम
(ख) पठानि
(ग) अपठत्
(घ) अपठम्

12. ‘पठ्’ धातोः लोट्लकारे उत्तमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) अपठम्
(ख) पठानि
(ग) पठेयम्
(घ) पठामि

13. ‘पठ्’ धातोः लृट्लकारे उत्तमपुरुषबहुवचने रूपं किम्?
(क) पठिष्यथ
(ख) पठिष्यावः
(ग) पठिष्यामः
(घ) पठिष्यन्ति

14. ‘गम्’ धातोः लङ्लकारे प्रथमपुरुषबहुवचने रूपं किम्?
(क) अगच्छत्
(ख) अगच्छन्
(ग) गच्छन्तु
(घ) अगच्छताम्

15. ‘सेव्’ धातोः लृट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) सेविष्यति
(ख) असेवत
(ग) सेवते
(घ) सेविष्यते

16. ‘लभ्’ धातोः लङ्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) अलभत
(ख) लभताम्
(ग) अलभत्
(घ) लभेत

17. ‘लभ्’ धातोः लृट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) लभिष्यति
(ख) लप्स्यते
(ग) अलभत
(घ) लभिष्यते

18. ‘सेव्’ धातोः लोट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) सेवते
(ख) सेवतु
(ग) सेवेत
(घ) सेवताम्

19. ‘वृत्’ धातोः लट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) वृत्यते
(ख) वर्तते
(ग) वर्तति
(घ) वृतति

20. ‘दृश्’ धातोः लृट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) अपश्यत्
(ख) दर्शिष्यति
(ग) द्रक्ष्यति
(घ) पश्यिष्यति

21. ‘स्था’ धातोः लृट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) स्थिष्यति
(ख) तिष्ठिष्यति
(ग) अतिष्ठत्
(घ) स्थास्यति

22. ‘पा’ धातोः लृट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) अपिबत्
(ख) पायिष्यति
(ग) पिबिष्यति
(घ) पास्यति

23. ‘दा’ धातोः लृट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) यच्छिष्यति
(ख) अयच्छत्
(ग) ददिष्यति
(घ) दास्यति

24. ‘नी’ धातोः लट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) नयति
(ख) नेति
(ग) नेष्यति
(घ) नीयति

25. ‘नी’ धातोः लृट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) नीष्यति
(ख) अनयत्
(ग) नयिष्यति
(घ) नेष्यति

26. ‘श्रु’ धातोः लट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) श्रवति
(ख) श्रोष्यति
(ग) शृणुति
(घ) शृणोति

27. ‘ज्ञा’ धातोः लट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) जानति
(ख) जानाति
(ग) ज्ञाति
(घ) ज्ञास्यति

28. ‘इष्’ धातोः लट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) इषति
(ख) एषिष्यति
(ग) इच्छति
(घ) एषति

29. ‘छात्राः श्वः विद्यालयं ____।’ — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) गमिष्यन्ति
(ख) गमिष्यति
(ग) अगच्छन्
(घ) गच्छन्ति

30. ‘ह्यः अहं चित्रम् ____।’ — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) द्रक्ष्यामि
(ख) अपश्यम्
(ग) पश्यामि
(घ) अपश्यत्

31. ‘त्वं प्रतिदिनं पाठं ____।’ — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) पठसि
(ख) पठति
(ग) पठामि
(घ) पठथ

32. ‘वयं गुरून् ____।’ (लोट्लकारः) — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) सेवामहे
(ख) सेवन्ताम्
(ग) सेवावहै
(घ) सेवामहै

33. ‘भवान् किं ____?’ — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) करोषि
(ख) कुरुथ
(ग) करोमि
(घ) करोति

34. ‘यूयं कुत्र ____?’ — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) गच्छथ
(ख) गच्छामः
(ग) गच्छन्ति
(घ) गच्छथः

35. ‘आवां ____।’ (पठ्, लट्) — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) पठतः
(ख) पठथः
(ग) पठावः
(घ) पठामः

36. ‘सः अत्र वसति स्म।’ — अस्य समानार्थकं रूपं किम्?
(क) वसेत्
(ख) वसतु
(ग) वसिष्यति
(घ) अवसत्

37. ‘रामः लक्ष्मणः च वनं ____।’ — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) गच्छति
(ख) गच्छथः
(ग) गच्छन्ति
(घ) गच्छतः

38. ‘अहं त्वं च ____।’ (पठ्, लट्) — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) पठावः
(ख) पठतः
(ग) पठथः
(घ) पठामः

39. ‘सर्वे ____ सुखिनः।’ — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) भवन्तु
(ख) भविष्यन्ति
(ग) भवन्ति
(घ) अभवन्

40. ‘सत्यं ____ प्रियं ____।’ — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) ब्रवीति
(ख) वक्ष्यति
(ग) अब्रवीत्
(घ) ब्रूयात्

इस स्तर के उत्तर और कारण लेख के अंत में ‘उत्तर कुंजी’ में दिए गए हैं — पहले ख़ुद हल करें, फिर मिलाएँ।

बहुविकल्पीय प्रश्न — स्तर 3: कठिन (कक्षा 11–12, प्रतियोगी परीक्षाएँ)

कठिनस्तरीयाः प्रश्नाः संस्कृतभाषायाम् — सूत्र, पद-परिचय, असङ्गत-युग्म, कथन-कारण च।

1. ‘अपठत्’ इति पदे धातुः लकारः च कः?
(क) पठ्, लट्
(ख) पठ्, लृट्
(ग) पठ्, लङ्
(घ) पठ्, लोट्

2. ‘करिष्यामः’ इति पदस्य परिचयः कः?
(क) कृ, लोट्, उत्तमपुरुषः, बहुवचनम्
(ख) कृ, लृट्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्
(ग) कृ, लट्, उत्तमपुरुषः, बहुवचनम्
(घ) कृ, लृट्, उत्तमपुरुषः, बहुवचनम्

3. ‘पठेयुः’ इति पदस्य परिचयः कः?
(क) पठ्, लङ्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्
(ख) पठ्, लोट्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्
(ग) पठ्, विधिलिङ्, उत्तमपुरुषः, एकवचनम्
(घ) पठ्, विधिलिङ्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्

4. ‘अगच्छताम्’ इति पदस्य परिचयः कः?
(क) गम्, लट्, प्रथमपुरुषः, द्विवचनम्
(ख) गम्, लङ्, प्रथमपुरुषः, द्विवचनम्
(ग) गम्, लोट्, प्रथमपुरुषः, द्विवचनम्
(घ) गम्, लङ्, मध्यमपुरुषः, द्विवचनम्

5. ‘सेवेत’ इति पदस्य परिचयः कः?
(क) सेव्, विधिलिङ्, मध्यमपुरुषः, बहुवचनम्
(ख) सेव्, लोट्, प्रथमपुरुषः, एकवचनम्
(ग) सेव्, विधिलिङ्, प्रथमपुरुषः, एकवचनम्
(घ) सेव्, लङ्, प्रथमपुरुषः, एकवचनम्

6. ‘लभस्व’ इति पदस्य परिचयः कः?
(क) लभ्, लोट्, मध्यमपुरुषः, एकवचनम्
(ख) लभ्, विधिलिङ्, मध्यमपुरुषः, एकवचनम्
(ग) लभ्, लोट्, प्रथमपुरुषः, एकवचनम्
(घ) लभ्, लट्, मध्यमपुरुषः, एकवचनम्

7. ‘आस्ताम्’ इति पदस्य परिचयः कः?
(क) अस्, लङ्, मध्यमपुरुषः, द्विवचनम्
(ख) अस्, लोट्, प्रथमपुरुषः, द्विवचनम्
(ग) अस्, लङ्, प्रथमपुरुषः, द्विवचनम्
(घ) अस्, लट्, प्रथमपुरुषः, द्विवचनम्

8. ‘स्याम’ इति पदस्य परिचयः कः?
(क) अस्, लङ्, उत्तमपुरुषः, बहुवचनम्
(ख) अस्, विधिलिङ्, प्रथमपुरुषः, एकवचनम्
(ग) अस्, लोट्, उत्तमपुरुषः, बहुवचनम्
(घ) अस्, विधिलिङ्, उत्तमपुरुषः, बहुवचनम्

9. ‘कुर्वन्ति’ इति पदस्य परिचयः कः?
(क) कृ, लट्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्
(ख) कृ, लङ्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्
(ग) कृ, लृट्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्
(घ) कृ, लोट्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्

10. ‘अकुर्वन्’ इति पदस्य परिचयः कः?
(क) कृ, लट्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्
(ख) कृ, लङ्, उत्तमपुरुषः, एकवचनम्
(ग) कृ, लङ्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्
(घ) कृ, लोट्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्

11. ‘गमिष्यथ’ इति पदस्य परिचयः कः?
(क) गम्, लृट्, उत्तमपुरुषः, बहुवचनम्
(ख) गम्, लट्, मध्यमपुरुषः, बहुवचनम्
(ग) गम्, लृट्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्
(घ) गम्, लृट्, मध्यमपुरुषः, बहुवचनम्

12. ‘पठानि’ इति पदस्य परिचयः कः?
(क) पठ्, लोट्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्
(ख) पठ्, लोट्, उत्तमपुरुषः, एकवचनम्
(ग) पठ्, लट्, उत्तमपुरुषः, एकवचनम्
(घ) पठ्, विधिलिङ्, उत्तमपुरुषः, एकवचनम्

13. ‘लप्स्यन्ते’ इति पदस्य परिचयः कः?
(क) लभ्, लृट्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्
(ख) लभ्, लृट्, मध्यमपुरुषः, बहुवचनम्
(ग) लभ्, लट्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्
(घ) लभ्, लङ्, प्रथमपुरुषः, बहुवचनम्

14. अधोलिखितेषु आत्मनेपदी धातुः कः?
(क) पा
(ख) पठ्
(ग) लभ्
(घ) गम्

15. अधोलिखितेषु उभयपदी धातुः कः?
(क) सेव्
(ख) लभ्
(ग) पठ्
(घ) कृ

16. ‘कृ’ धातुः कस्मिन् गणे अस्ति?
(क) भ्वादिगणे
(ख) अदादिगणे
(ग) तनादिगणे
(घ) चुरादिगणे

17. ‘अस्’ (भुवि) धातुः कस्मिन् गणे अस्ति?
(क) तनादिगणे
(ख) भ्वादिगणे
(ग) दिवादिगणे
(घ) अदादिगणे

18. ‘पठ्’ धातुः कस्मिन् गणे अस्ति?
(क) क्र्यादिगणे
(ख) भ्वादिगणे
(ग) अदादिगणे
(घ) चुरादिगणे

19. ‘ज्ञा’ धातुः कस्मिन् गणे अस्ति?
(क) स्वादिगणे
(ख) क्र्यादिगणे
(ग) भ्वादिगणे
(घ) अदादिगणे

20. ‘श्रु’ धातुः कस्मिन् गणे अस्ति?
(क) स्वादिगणे
(ख) दिवादिगणे
(ग) भ्वादिगणे
(घ) क्र्यादिगणे

21. ‘दिव्’ धातुः कस्मिन् गणे अस्ति?
(क) तुदादिगणे
(ख) रुधादिगणे
(ग) भ्वादिगणे
(घ) दिवादिगणे

22. ‘चुर्’ धातुः कस्मिन् गणे अस्ति?
(क) तनादिगणे
(ख) तुदादिगणे
(ग) भ्वादिगणे
(घ) चुरादिगणे

23. ‘सः अहं च ____।’ (गम्, लट्) — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) गच्छथः
(ख) गच्छामि
(ग) गच्छावः
(घ) गच्छतः

24. ‘त्वं सः च ____।’ (गम्, लट्) — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) गच्छथः
(ख) गच्छतः
(ग) गच्छावः
(घ) गच्छसि

25. ‘भवती किं ____?’ — उचितं क्रियापदं चिनुत।
(क) करोति
(ख) करोमि
(ग) कुरुथ
(घ) करोषि

26. लङ्लकारे धातोः पूर्वं कः आगमः भवति?
(क) तु
(ख) इट् (इ)
(ग) स्य
(घ) अट् (अ)

27. लृट्लकारस्य विशेषं चिह्नं किम्?
(क) एत्
(ख) स्य / इष्य
(ग) तु
(घ) अ (अट्)

28. ‘स्म’ योगे लट्लकारः कं कालं बोधयति?
(क) आज्ञाम्
(ख) भविष्यत्कालम्
(ग) वर्तमानकालम्
(घ) भूतकालम्

29. ‘पठ्’ धातोः विधिलिङ्लकारे मध्यमपुरुषबहुवचने रूपं किम्?
(क) पठेयुः
(ख) पठेत
(ग) पठेतम्
(घ) पठेम

30. ‘गम्’ धातोः लोट्लकारे मध्यमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) गच्छेः
(ख) गच्छ
(ग) गच्छतु
(घ) गच्छानि

31. ‘अस्’ धातोः लोट्लकारे मध्यमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) अस्तु
(ख) स्याः
(ग) एधि
(घ) असि

32. ‘कृ’ धातोः लोट्लकारे मध्यमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) कुरु
(ख) करोषि
(ग) करोतु
(घ) कुर्याः

33. ‘सेव्’ धातोः लङ्लकारे उत्तमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) असेवे
(ख) असेवत
(ग) असेवम्
(घ) सेवे

34. ‘लभ्’ धातोः विधिलिङ्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने रूपं किम्?
(क) लभेत्
(ख) लभेत
(ग) लभताम्
(घ) अलभत

35. ‘वृत्’ धातोः लृट्लकारे प्रथमपुरुषैकवचने आत्मनेपदि रूपं किम्?
(क) वर्तिष्यते
(ख) वर्तताम्
(ग) वर्तते
(घ) अवर्तत

36. असङ्गतं युग्मं चिनुत—
(क) पठिष्यति — लृट्
(ख) अपठत् — लङ्
(ग) पठतु — लोट्
(घ) पठेत् — लट्

37. कथनम् (A): ‘अहं पठामि’ इति वाक्यं शुद्धम्।
कारणम् (R): ‘अस्मद्’ (अहम्) कर्तरि क्रिया उत्तमपुरुषे भवति।
(क) कथनम् (A) कारणम् (R) च उभे सत्ये, R च A-इत्यस्य सम्यक् व्याख्या अस्ति।
(ख) कथनम् (A) कारणम् (R) च उभे सत्ये, किन्तु R A-इत्यस्य सम्यक् व्याख्या नास्ति।
(ग) कथनम् (A) सत्यम्, कारणम् (R) असत्यम्।
(घ) कथनम् (A) असत्यम्, कारणम् (R) सत्यम्।

38. कथनम् (A): ‘भवान् पठसि’ इति वाक्यं शुद्धम्।
कारणम् (R): ‘भवत्’ शब्दस्य योगे क्रिया प्रथमपुरुषे भवति।
(क) कथनम् (A) कारणम् (R) च उभे सत्ये, R च A-इत्यस्य सम्यक् व्याख्या अस्ति।
(ख) कथनम् (A) कारणम् (R) च उभे सत्ये, किन्तु R A-इत्यस्य सम्यक् व्याख्या नास्ति।
(ग) कथनम् (A) सत्यम्, कारणम् (R) असत्यम्।
(घ) कथनम् (A) असत्यम्, कारणम् (R) सत्यम्।

39. कथनम् (A): ‘ह्यः सः ग्रामम् अगच्छत्’ इति वाक्यं शुद्धम्।
कारणम् (R): ‘ह्यः’ इति अव्ययेन भविष्यत्कालः बोध्यते।
(क) कथनम् (A) कारणम् (R) च उभे सत्ये, R च A-इत्यस्य सम्यक् व्याख्या अस्ति।
(ख) कथनम् (A) कारणम् (R) च उभे सत्ये, किन्तु R A-इत्यस्य सम्यक् व्याख्या नास्ति।
(ग) कथनम् (A) सत्यम्, कारणम् (R) असत्यम्।
(घ) कथनम् (A) असत्यम्, कारणम् (R) सत्यम्।

40. कथनम् (A): ‘लभ्’ धातोः लट्लकारे ‘लभति’ इति रूपं शुद्धम्।
कारणम् (R): ‘लभ्’ आत्मनेपदी धातुः अस्ति।
(क) कथनम् (A) कारणम् (R) च उभे सत्ये, R च A-इत्यस्य सम्यक् व्याख्या अस्ति।
(ख) कथनम् (A) कारणम् (R) च उभे सत्ये, किन्तु R A-इत्यस्य सम्यक् व्याख्या नास्ति।
(ग) कथनम् (A) सत्यम्, कारणम् (R) असत्यम्।
(घ) कथनम् (A) असत्यम्, कारणम् (R) सत्यम्।

इस स्तर के उत्तर और कारण लेख के अंत में ‘उत्तर कुंजी’ में दिए गए हैं — पहले ख़ुद हल करें, फिर मिलाएँ।

उत्तर कुंजी (उत्तर और कारण)

स्तर 1: आसान (कक्षा 6–8)

1. (ग) — लट्, लिट्, लुट्, लृट्, लेट्, लोट्, लङ्, लिङ् (विधि, आशीः), लुङ्, लृङ्।

2. (ख) — कक्षा 6–10 में यही पाँच लकार पढ़ाए जाते हैं।

3. (ग) — पठति — पढ़ता है।

4. (क) — पठिष्यति — पढ़ेगा।

5. (क) — अपठत् — पढ़ा।

6. (घ) — पठतु — पढ़े।

7. (घ) — पठेत् — पढ़ना चाहिए।

8. (ख) — प्रथम, मध्यम, उत्तम।

9. (क) — एकवचन, द्विवचन, बहुवचन।

10. (घ) — भ्वादि से चुरादि तक दस गण।

11. (घ) — भ्वादिगण का नाम ही ‘भू’ से है।

12. (ग) — सः पठति।

13. (ग) — ते पठन्ति।

14. (ख) — अहं पठामि।

15. (क) — त्वं पठसि।

16. (घ) — गम् → गच्छ् (लट् में)।

17. (ख) — भविष्यत् — ‘इष्य’ जुड़ता है।

18. (ग) — भूतकाल — आगे ‘अ’।

19. (ग) — आज्ञा — ‘तु’।

20. (घ) — चाहिए — ‘एत्’।

21. (ग) — सः अस्ति।

22. (ख) — ते सन्ति।

23. (घ) — भू → भव्।

24. (घ) — सः करोति।

25. (घ) — दृश् → पश्य् (लट् में)।

26. (क) — स्था → तिष्ठ्।

27. (क) — पा → पिब्।

28. (क) — दा → यच्छ् (भ्वादि); ददाति भी होता है।

29. (घ) — अहं पठामि।

30. (घ) — त्वं पठसि।

31. (ग) — सः पठति।

32. (घ) — भवान् पठति — मध्यम नहीं।

33. (क) — लभते — आत्मनेपदी।

34. (ख) — आत्मनेपदी — ‘ते’।

35. (ख) — आत्मनेपदी।

36. (क) — तौ पठतः।

37. (घ) — वयं पठामः।

38. (घ) — पठति स्म = पढ़ता था।

39. (ग) — श्वः गमिष्यामि।

40. (घ) — ह्यः अगच्छम्।

स्तर 2: मध्यम (कक्षा 9–10, बोर्ड परीक्षा)

1. (ख) — लृट् में मूल ‘गम्’ — गमिष्यति।

2. (ग) — करिष्यति।

3. (ग) — अभवत्।

4. (ग) — आसीत्।

5. (क) — अस्तु।

6. (ग) — स्यात्।

7. (ख) — लृट् में ‘अस्’ के स्थान पर ‘भू’ — भविष्यति।

8. (घ) — अकरोत्।

9. (घ) — करोतु।

10. (ग) — कुर्यात्।

11. (घ) — अहम् अपठम्।

12. (ख) — अहं पठानि।

13. (ग) — वयं पठिष्यामः।

14. (ख) — ते अगच्छन्।

15. (घ) — आत्मनेपदी लृट् — सेविष्यते।

16. (क) — आत्मनेपदी लङ् — अलभत।

17. (ख) — लभ् + स्य → लप्स्यते।

18. (घ) — आत्मनेपदी लोट् — सेवताम्।

19. (ख) — आत्मनेपदी — वर्तते।

20. (ग) — द्रक्ष्यति।

21. (घ) — स्थास्यति।

22. (घ) — पास्यति।

23. (घ) — दास्यति।

24. (क) — नी → नय् — नयति।

25. (घ) — नेष्यति।

26. (घ) — शृणोति।

27. (ख) — जानाति।

28. (ग) — इष् → इच्छ् — इच्छति।

29. (क) — ‘श्वः’ — लृट्, बहुवचन।

30. (ख) — ‘ह्यः’ — लङ्, उत्तम पुरुष।

31. (क) — ‘त्वम्’ — मध्यम पुरुष एकवचन।

32. (घ) — आत्मनेपदी लोट् उत्तम बहुवचन — सेवामहै।

33. (घ) — ‘भवान्’ के साथ प्रथम पुरुष।

34. (क) — ‘यूयम्’ — मध्यम पुरुष बहुवचन।

35. (ग) — ‘आवाम्’ — उत्तम पुरुष द्विवचन।

36. (घ) — लट् + स्म = भूतकाल, अर्थात् लङ् — अवसत्।

37. (घ) — दो कर्ता — द्विवचन, प्रथम पुरुष।

38. (क) — उत्तम पुरुष प्रधान — द्विवचन ‘पठावः’।

39. (क) — आशीर्वाद/प्रार्थना — लोट्।

40. (घ) — ‘चाहिए’ अर्थ — विधिलिङ्।

स्तर 3: कठिन (कक्षा 11–12, प्रतियोगी परीक्षाएँ)

1. (ग) — आगे ‘अ’ — लङ्।

2. (घ) — करिष्यामः — लृट् उत्तम बहु।

3. (घ) — पठेत्, पठेताम्, पठेयुः।

4. (ख) — अगच्छत्, अगच्छताम्, अगच्छन्।

5. (ग) — आत्मनेपदी विधिलिङ् — सेवेत, सेवेयाताम्, सेवेरन्।

6. (क) — आत्मनेपदी लोट् मध्यम एकवचन।

7. (ग) — आसीत्, आस्ताम्, आसन्।

8. (घ) — स्याम्, स्याव, स्याम।

9. (क) — करोति, कुरुतः, कुर्वन्ति।

10. (ग) — अकरोत्, अकुरुताम्, अकुर्वन्।

11. (घ) — गमिष्यसि, गमिष्यथः, गमिष्यथ।

12. (ख) — पठानि, पठाव, पठाम।

13. (क) — लप्स्यते, लप्स्येते, लप्स्यन्ते।

14. (ग) — लभ् आत्मनेपदी; शेष परस्मैपदी।

15. (घ) — करोति / कुरुते — उभयपदी।

16. (ग) — कृ — तनादिगण (8वाँ)।

17. (घ) — अस् — अदादिगण (2रा)।

18. (ख) — पठ् — भ्वादिगण।

19. (ख) — जानाति — क्र्यादिगण।

20. (क) — शृणोति — स्वादिगण।

21. (घ) — दीव्यति — दिवादिगण।

22. (घ) — चोरयति — चुरादिगण।

23. (ग) — संयुक्त कर्ता में उत्तम पुरुष प्रधान, द्विवचन।

24. (क) — प्रथम + मध्यम में मध्यम प्रधान, द्विवचन।

25. (क) — ‘भवती’ के साथ भी प्रथम पुरुष।

26. (घ) — अपठत्, अगच्छत् — ‘अ’ आगम।

27. (ख) — पठिष्यति, दास्यति।

28. (घ) — पठति स्म = अपठत्।

29. (ख) — पठेः, पठेतम्, पठेत।

30. (ख) — गच्छ, गच्छतम्, गच्छत।

31. (ग) — एधि, स्तम्, स्त।

32. (क) — कुरु, कुरुतम्, कुरुत।

33. (क) — आत्मनेपदी लङ् — असेवे, असेवावहि, असेवामहि।

34. (ख) — आत्मनेपदी — लभेत।

35. (क) — वर्तिष्यते (परस्मैपद में वर्त्स्यति भी)।

36. (घ) — ‘पठेत्’ विधिलिङ् का रूप है।

37. (क) — R ही A का कारण है।

38. (घ) — शुद्ध रूप ‘भवान् पठति’ — A असत्य, R सत्य।

39. (ग) — ‘ह्यः’ = बीता कल, भूतकाल; R असत्य।

40. (घ) — आत्मनेपदी होने से ‘लभते’ — A असत्य, R सत्य।

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